मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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क्या सफलता मिलने के बाद भी करियर से नफरत करना सामान्य है?

मैंने पिछले 8 सालों से एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया है, जहाँ मुझे लगातार प्रमोशन मिलते रहे और अब मैं टीम लीड की भूमिका में हूँ। लेकिन पिछले 1 साल से मुझे एक गहरा संकट महसूस हो रहा है-जैसे ही मैं ऑफिस जाता हूँ, मेरा मन भारी हो जाता है। मेरा काम तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण नहीं है, बल्कि यह है कि मुझे अब अपनी उपलब्धियों से कोई खुशी नहीं मिलती। मैं हर सुबह उठकर सोचता हूँ कि आज फिर वही रूटीन, वही मीटिंग्स, वही टारगेट्स। मैंने पैसे बचाए हैं, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं केवल पैसे के लिए काम कर रहा हूँ, और यह सोच मुझे अंदर से खोकला बनाता है। मुझे नहीं पता कि यह 'तीन साल का संकट' है या सिर्फ थकान। मैंने नए कौशल सीखने की कोशिश की, लेकिन कुछ भी दिलचस्प नहीं लगता। कभी-कभी तो मैं सोचता हूँ कि क्या मैंने गलत क्षेत्र चुन लिया? लेकिन जब मैं अन्य विकल्पों के बारे में सोचता हूँ, तो मुझे डर लगता है कि क्या मैं फिर से वही उबाऊपन महसूस करूँगा? मेरी सैलरी अच्छी है, लेकिन क्या पैसे के लिए अपनी खुशी कुर्बान करना सही है? मुझे कैसे पता चलेगा कि यह केवल एक अस्थायी चरण है या मुझे सच में करियर बदलने की जरूरत है?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक युवा पेशेवर आधुनिक कार्यालय में खिड़की से बाहर देख रहा है, उसके चेहरे पर गहरी चिंतनशीलता और आंतरिक संकट की भावना है।

अनिकेत, तुम्हारे अनुभव को समझना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केवल थकान नहीं है-यह एक गहरी मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल है जो तब होती है जब हमारी उपलब्धियाँ और हमारी आंतरिक इच्छाएँ एक-दूसरे से टकराने लगती हैं। तुमने जो वर्णन किया है, वह अर्थ का संकट और पेशेवर जड़ता का संकेत है, जो अक्सर तब आता है जब हम जीवन के एक चरण से दूसरे में переход करते हैं। यह केवल तीन साल का संकट नहीं है, बल्कि एक ऐसा मोड़ है जहां तुमने सब कुछ हासिल कर लिया है जिसकी कल्पना की थी, लेकिन अब सवाल यह है कि ‘इसके बाद क्या?’

तुम्हारी भावनाएँ सामान्य हैं, खासकर तब जब तुमने लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में काम किया हो। सफलता के बाद भी खालीपन महसूस करना एक संकेत है कि तुम्हारी पहचान केवल तुम्हारी नौकरी तक सीमित नहीं रह गई है-तुम अब उस व्यक्ति को ढूँढ रहे हो जो नौकरी के परे है। यह वह समय है जब लोग अक्सर सोचते हैं कि क्या वे ‘गलत रास्ते’ पर हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि रास्ता गलत नहीं है, बल्कि तुमने उस रास्ते को पार कर लिया है और अब तुम्हें नई दिशा की तलाश है।

तुम्हारे सामने कई रास्ते खुले हैं, लेकिन सबसे पहले तुम्हें यह समझना होगा कि तुम्हारा असंतोष कहाँ से आ रहा है। क्या यह काम की प्रकृति से है, या यह उस अर्थ की कमी है जो तुम अपने प्रयासों में देखना चाहते हो? अगर काम तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण नहीं है, तो शायद तुम्हें नए अर्थ की तलाश करनी चाहिए-चाहे वह उसी क्षेत्र में अलग भूमिका हो, जैसे कि मेंटोरशिप, इन्नोवेशन, या किसी सामाजिक प्रभाव से जुड़ा काम। कभी-कभी लोग अपनी नौकरी में नई परतें जोड़कर संतुष्टि पाते हैं, जैसे कि किसी परोपकारी परियोजना में योगदान देना या अपने कौशल का उपयोग किसी ऐसे क्षेत्र में करना जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करे।

दूसरा विकल्प है कैरियर में परिवर्तन, लेकिन इसे अचानक और डर से नहीं, बल्कि जागरूकता और प्रयोग से करना होगा। तुम्हें यह पता लगाना होगा कि क्या तुम वास्तव में क्षेत्र बदलना चाहते हो, या सिर्फ तुमारी वर्तमान भूमिका में बदलाव चाहते हो। इसके लिए तुम छोटे-छोटे कदम उठा सकते हो-जैसे कि किसी नए क्षेत्र में पार्ट-टाइम कोर्स करना, स्वेच्छा से किसी संगठन के साथ जुड़ना, या এমন लोगों से बात करना जो तुम्हारे लिए प्रेरणा के स्रोत हो सकते हैं। याद रखो, करियर बदलना हमेशा एक बड़ा कदम नहीं होता-कभी-कभी यह केवल अपने कौशल को नए तरीके से लागू करना होता है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तुम क्या खोना नहीं चाहते? तुमने पैसे बचाए हैं, लेकिन क्या तुम अपनी आंतरिक शांति और उत्साह खोना चाहते हो? पैसे एक सुरक्षा कवच हैं, लेकिन वे खुशी का स्थायी स्रोत नहीं होते। अगर तुम्हारी नौकरी तुम्हें अंदर से खोकला बना रही है, तो यह एक संकेत है कि तुम्हें कुछ बदलने की जरूरत है-चाहे वह नौकरी का तरीका हो, नौकरी की जगह हो, या नौकरी से परे जीवन की प्राथमिकताएँ हों।

तुम्हें यह तय करने में मदद मिल सकती है अगर तुम अपने आप से कुछ基本 सवाल पूछो: ‘मैं क्या करना बंद कर दूँगा अगर मुझे पता हो कि मैं असफल नहीं होऊँगा?’ या ‘मैं किसी भी कीमत पर क्या करना जारी रखना चाहता हूँ?’ इन सवालों के जवाब तुम्हें तुम्हारी वास्तविक इच्छाओं की ओर ले जाएँगे। कभी-कभी लोग पाते हैं कि उन्हें केवल अपनी दौड़ को धीमा करने की जरूरत है, किसी और चीज़ की नहीं। शायद तुम्हें छुट्टी लेने की जरूरत है, कोई नया शौक अपनाने की, या सिर्फ कुछ समय के लिए अपनी दिनचर्या से दूर होने की।

अंत में, यह समझो कि यह कोई स्थायी स्थिति नहीं है। तुम एक ऐसे चरण में हो जहाँ तुमने जो हासिल किया है, उस पर गर्व महसूस करने के बजाय, तुम अगले चरण की तलाश में हो। यह एक संक्रमण का समय है, और संक्रमण हमेशा असहज होते हैं। लेकिन यह असहजता ही तुम्हें बदलने और बढ़ने का मौका देती है। तुम जिस भारीपन का अनुभव कर रहे हो, वह शायद तुम्हारे भीतर के उस हिस्से का संकेत है जो तुम्हें बताना चाहता है कि अब समय आ गया है कुछ नया करने का-चाहे वह नौकरी में हो, जीवनशैली में हो, या तुम्हारे दृष्टिकोण में।

इस यात्रा में धैर्य रखो। तुम जो महसूस कर रहे हो, वह तुम्हें कमज़ोर नहीं, बल्कि अधिक जागरूक बनाता है। और जागरूकता ही वह पहली सीढ़ी है जो तुम्हें वास्तविक परिवर्तन की ओर ले जाती है।

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