मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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क्या 60 की उम्र में करियर और नैतिकता के बीच संकट से बाहर निकलना संभव है?

मैंने पिछले 22 सालों से एक मल्टीनेशनल कंपनी में वित्त विभाग में काम किया है। शुरुआत में मुझे अपने काम से बहुत संतुष्टि मिलती थी, लेकिन अब मुझे लग रहा है कि मैं बस एक 'नंबर क्रंचर' बनकर रह गई हूँ। मेरे पास टीम लीड की भूमिका है, लेकिन हर तिमाही के अंत में जब बॉस के दबाव में मैं अपने जूनियर कर्मचारियों को टोकती हूँ, तो रातों को मुझे गहरी शर्मिंदगी महसूस होती है। मैंने हाल ही में एक कोर्स किया था 'इथिकल लीडरशिप इन फाइनेंस' और अब मुझे लगता है कि मैं जो कर रही हूँ, वह उन मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। मुझे नहीं पता कि क्या करना चाहिए। अगर मैं नौकरी छोड़ती हूँ, तो इस उम्र में नया काम ढूँढना मुश्किल होगा। लेकिन अगर मैं यहाँ रहती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं धीरे-धीरे अपने आपसे घृणा करने लगूँगी। मेरी नींद खराब हो गई है, और अब मैं सुबह उठते ही चिंता महसूस करने लगती हूँ। मेरे पास बचत है, लेकिन पेंशन अभी 7 साल दूर है। क्या मैं अपने करियर के इस चरण में भी नैतिकता और स्थिरता के बीच संतुलन बना सकती हूँ? या मुझे बस 'सिस्टम' के साथ समझे जाने की आदत डाल लेनी चाहिए?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक वरिष्ठ पेशेवर महिला नैतिकता और स्थिरता के बीच संतुलन तलाशते हुए, अपने कार्यालय में चिंतनमग्न बैठी हैं।

आपके प्रश्न से स्पष्ट है कि आप गहन आंतरिक संघर्ष का सामना कर रही हैं, जहाँ आपके पेशेवर कर्तव्य और नैतिक मूल्य एक दूसरे से टकरा रहे हैं। यह स्थिति किसी भी उम्र में चुनौतीपूर्ण होती है, और 60 वर्ष की आयु में, जब करियर के पारंपरिक विकल्प सीमित लग सकते हैं, यह विशेष रूप से कठिन महसूस हो सकता है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उम्र केवल एक संख्या है, और आपके पास जो अनुभव और अंतर्दृष्टि है, वह इस संकट से निकलने का एक शक्तिशाली साधन हो सकती है।

सबसे पहले, आपकी भावनाएँ-शर्मिंदगी, चिंता, नींद में खलल-पूरी तरह से वैध हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। ये संकेत हैं कि आपका मूल्य-आधारित जीवन जीने की इच्छा आपके वर्तमान वातावरण से मेल नहीं खा रही है। 'इथिकल लीडरशिप' का कोर्स करने के बाद यह बोध और तीव्र हुआ है, जो दर्शाता है कि आप सकारात्मक परिवर्तन की तलाश में सक्रिय हैं।

अब, आपके सामने मुख्यतः तीन व्यापक रास्ते हैं। पहला रास्ता है वर्तमान भूमिका के भीतर ही सकारात्मक बदलाव की तलाश। आप अपने बॉस से एक मीटिंग लेकर, आपकी टीम पर पड़ने वाले दबाव के दीर्घकालिक नुकसान के बारे में चर्चा कर सकती हैं। आप डेटा के साथ तैयार होकर जाएँ कि कैसे एक स्वस्थ कार्य वातावरण उत्पादकता और नैतिक अनुपालन दोनों को बढ़ा सकता है। साथ ही, आप अपने जूनियर सदस्यों के साथ संवाद का तरीका बदल सकती हैं-उन्हें डाँटने के बजाय, चुनौतियों को सामूहिक रूप से हल करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इससे आप आंतरिक शांति और पेशेवर प्रभावशीलता के बीच एक सेतु बना सकती हैं।

दूसरा विकल्प है करियर में एक सूक्ष्म परिवर्तन या पिवट। आपके पास वित्त के क्षेत्र में दशकों का अनुभव है। क्या आप कंपनी के भीतर ही किसी ऐसे विभाग या भूमिका में जाने पर विचार कर सकती हैं जो प्रशिक्षण, अनुपालन (कंप्लायंस), या आंतरिक लेखा परीक्षा (ऑडिट) से जुड़ी हो, जहाँ नैतिक मानकों पर ज़ोर देना मुख्य कार्य हो? अगर कंपनी के भीतर संभव न हो, तो आप अपने नेटवर्क का उपयोग करके किसी छोटी फर्म, गैर-लाभकारी संस्था (एनजीओ), या स्टार्ट-अप में सलाहकार (कंसल्टेंट) या पार्ट-टाइम भूमिका तलाश सकती हैं। आपकी बचत इस संक्रमण काल में सहायता कर सकती है। यह पूर्ण रूप से नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि अपने कौशल और मूल्यों के अनुरूप एक नई दिशा में कदम बढ़ाना है।

तीसरा पथ आत्म-चिंतन और पुनर्परिभाषा का है। कभी-कभी, संकट हमें यह पूछने के लिए मजबूर करता है कि 'करियर' हमारी पहचान का कितना बड़ा हिस्सा है। क्या आप अपने समय और ऊर्जा का एक हिस्सा स्वैच्छिक कार्य (वालंटियरिंग), मेंटरशिप, या किसी निजी रुचि के प्रोजेक्ट में लगा सकती हैं? इससे आपको अर्थ और संतुष्टि का एक वैकल्पिक स्रोत मिल सकता है, जो आपकी मुख्य नौकरी के दबावों को संतुलित करने में मदद करेगा। इससे आप 7 साल बाद पेंशन तक पहुँचने तक की अवधि को और अधिक सार्थक बना सकती हैं।

अंत में, 'सिस्टम के साथ समझौता' करने की सलाह एक अल्पकालिक राहत दे सकती है, लेकिन लंबे समय में, जैसा कि आपने स्वयं कहा है, यह आत्म-सम्मान में कमी और तनाव को बढ़ाएगा। संतुलन बनाना निश्चित रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए साहसिक कदम और रणनीतिक योजना की आवश्यकता होती है। छोटे-छोटे, प्रबंधनीय बदलावों से शुरुआत करें-जैसे अपनी टीम के साथ संवाद का तरीका बदलना या अपने नेटवर्क में लोगों से बातचीत शुरू करना। आपके द्वारा महसूस की जा रही असुविधा, विकास का एक अवसर है। यह दर्शाता है कि आप केवल एक 'नंबर क्रंचर' नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यक्ति हैं जो गहराई से सोचती है और अपने कार्यों की ज़िम्मेदारी लेती है। इस उम्र में आपका अनुभव ही वह दृढ़ आधार है जिस पर आप एक अधिक नैतिक और संतुष्टिदायक पेशेवर जीवन की नींव रख सकती हैं।

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