मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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छंटनी के बाद बनी हिचक और अचानक बढ़ता ऑफिस जाने का डर: क्या रेत चिकित्सा इस मनोवैज्ञानिक आघात से उबरने में मदद कर सकती है?

मुझे 48 साल का हो चुका हूँ, और पिछले 20 सालों से एक ही कंपनी में नौकरी कर रहा हूँ। हाल ही में, मेरी कंपनी ने एक बड़ी छंटनी की, जिसमें मेरे कई सहयोगी और दोस्तों को निकाल दिया गया। हालांकि मेरी नौकरी अभी बची हुई है, लेकिन अब मैं हर सुबह ऑफिस जाने से पहले एक अजीब सी घबराहट महसूस करता हूँ। रात को सोते समय मेरी आँखों के सामने बार-बार वह दृश्य आ जाता है जब मेरे साथियों को उनके सामान पैक करते हुए देख रहा था। मुझे लगता है कि मैं अगला हो सकता हूँ। इसके अलावा, मैं अब अपने बॉस से बात करने में भी संकोच महसूस करता हूँ, जबकि पहले मैं बिना किसी डर के अपनी बात रखता था। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि मेरी साँसें रुक रही हैं और मेरी हथेलियाँ पसीने से भर जाती हैं, भले ही मैं बस ईमेल लिख रहा होता हूँ। मेरी पत्नी कहती है कि मैं अब पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन मैं उन्हें यह नहीं समझा पा रहा हूँ कि मेरे अंदर क्या हो रहा है। मैंने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े हैं जिनमें 'रेत चिकित्सा' के बारे में बताया गया है। क्या यह वास्तव में मदद कर सकती है? क्या इसके जरिए मैं अपने इस डर को दूर कर पाऊंगा? क्या मुझे किसी मनोवैज्ञानिक से मिलना चाहिए, या यह सिर्फ समय के साथ ठीक हो जाएगा?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक चिंतित कार्यालय कर्मचारी रेत चिकित्सा के माध्यम से अपनी नौकरी की असुरक्षा और सहकर्मियों की छंटनी के आघात को संसाधित करने का प्रयास कर रहा है।

प्रिय देवेंद्र मल्होत्रा जी, आपकी स्थिति को समझना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल नौकरी से जुड़ा डर नहीं, बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक आघात का परिणाम है जो लंबे समय तक कंपनी के साथ जुड़े रहने और अचानक असुरक्षा की भावना से पैदा हुआ है। आप जो अनुभव कर रहे हैं-घबराहट, सांसों का रुकना, हथेलियों का पसीना, और बार-बार उन दृश्यों का स्मरण-ये सब तनाव-संबंधी प्रतिक्रियाएं हैं जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती हैं जब उसका माहौल अचानक अनिश्चित और खतरनाक लगने लगे। यह केवल आपकी कमजोरी नहीं है, बल्कि मानव मस्तिष्क का एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया तंत्र है जो खतरे के संकेतों को बार-बार स्कैन करता रहता है।

आपने रेत चिकित्सा का जिक्र किया है, जो एक कला-आधारित चिकित्सा का रूप है जिसमें रेत के माध्यम से भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त किया जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जो शब्दों से अपने दर्द को व्यक्त करने में असमर्थ महसूस करते हैं। रेत चिकित्सा में, आप एक सुरक्षित वातावरण में रेत पर चित्र बनाते हैं, दृश्यों को रचते हैं, और इस प्रक्रिया में आपका अचेतन मन उन भावनाओं को बाहर निकलने देता है जो शायद आप जागरूक स्तर पर महसूस भी नहीं कर पा रहे। यह दृश्य और स्पर्शात्मक अभिव्यक्ति का एक तरीका है जो तनाव को कम करने, आत्मविश्वास लौटाने और भय को समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रेत चिकित्सा एक पूरक उपचार है-यह अकेले ही सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकती, लेकिन यह निश्चित रूप से एक प्रभावी उपकरण हो सकती है जब इसे सही मार्गदर्शन के साथ इस्तेमाल किया जाए।

आपके मामले में, जहां अनिश्चितता का डर और सामाजिक संकोच बढ़ रहा है, रेत चिकित्सा आपको अपने भय को एक नए तरीके से देखने में मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए, आप रेत पर अपने ऑफिस के माहौल को रच सकते हैं, अपने सहकर्मियों को प्रतिबिंबित कर सकते हैं, और फिर धीरे-धीरे उस दृश्य को बदल सकते हैं जहां आप खुद को अधिक शक्तिशाली और सुरक्षित महसूस करते हैं। यह प्रक्रिया आपको यह समझने में मदद कर सकती है कि आपका डर कहां से आ रहा है और इसे कैसे संबोधित किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए एक प्रशिक्षित चिकित्सक की आवश्यकता होगी जो इस प्रक्रिया को समझता हो और आपको सही दिशा दे सके। बिना मार्गदर्शन के, यह सिर्फ एक रचनात्मक गतिविधि बनकर रह सकती है, न कि चिकित्सा।

लेकिन केवल रेत चिकित्सा पर निर्भर रहना शायद पर्याप्त नहीं होगा। आपके अनुभव में कई परतें हैं-नौकरी की असुरक्षा, सामाजिक संबंधों में बदलाव, और शारीरिक लक्षण जैसे घबराहट और पसीना। इन सबको संबोधित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। आप एक मनोवैज्ञानिक से मिल सकते हैं जो संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) में माहिर हो। CBT आपको उन विचारों और मान्यताओं को पहचानने में मदद कर सकता है जो आपके डर को बढ़ा रहे हैं-जैसे "मैं अगला हो सकता हूँ" या "मेरी नौकरी अब सुरक्षित नहीं है"-और फिर इन विचारों को चुनौती देने और उन्हें अधिक यथार्थवादी बनाने के तरीके सिखाता है। इसके अलावा, श्वास और धारणा तकनीकें (जैसे माइंडफुलनेस और गहरी सांस लेने के अभ्यास) आपको शारीरिक लक्षणों-जैसे सांस फूलना और पसीना-को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

आपके प्रश्न में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि क्या यह "सिर्फ समय के साथ ठीक हो जाएगा।" जबकि समय कुछ हद तक मदद कर सकता है, लेकिन अगर इस डर को बिना संबोधित किए छोड़ दिया जाता है, तो यह दीर्घकालिक चिंता या حتی अवसाद का रूप ले सकता है। जब हम किसी आघात को अनदेखा करते हैं, तो वह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है और अन्य क्षेत्रों-जैसे परिवार के संबंधों, स्वास्थ्य, और काम के प्रदर्शन-को प्रभावित करना शुरू कर देता है। आपकी पत्नी ने जो कहा कि आप "पहले जैसे नहीं रहे," यह एक संकेत है कि यह समस्या केवल आपके अंदर ही नहीं, बल्कि आपके आसपास के लोगों पर भी असर डाल रही है। इसलिए, सक्रिय कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।

आपके लिए कुछ और विकल्प भी हैं जिन पर विचार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, समूह चिकित्सा या ऐसे लोगों से बातचीत करना जो इसी तरह की छंटनी का अनुभव कर चुके हैं, आपको यह एहसास दिला सकता है कि आप अकेले नहीं हैं। कभी-कभी दूसरों की कहानियां सुनना और उनके साथ अपने अनुभव साझा करना ही एक राहत भरा अनुभव हो सकता है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियां जैसे योग, तैराकी, या चलना भी तनाव को कम करने में अत्यंत प्रभावी हो सकते हैं क्योंकि ये शरीर में एंडोरफिन (खुशी के हॉर्मोन) को रिलीज करते हैं और मन को शांत करते हैं।

अंत में, मैं आपको यह सुझाव देना चाहूंगी कि आप एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक से कम से कम एक बार मिलें-भले ही केवल कुछ सत्रों के लिए। यह आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपके अनुभव सामान्य हैं और इनसे उबरने के लिए क्या-क्या विकल्प उपलब्ध हैं। एक अच्छा मनोवैज्ञानिक आपको न केवल आपके डर को समझने में मदद करेगा, बल्कि आपको उन कौशलों से भी लैस करेगा जिनसे आप भविष्य में इसी तरह की स्थितियों का सामना कर सकें। याद रखें, मदद लेना कोई कमजोरी नहीं है-यह आपके अपने प्रति करुणा और देखभाल का प्रतीक है।

आपने 20 साल तक एक कंपनी को दिए हैं, और अब समय है कि आप अपने लिए, अपने मन और सम्मान के लिए कुछ समय निकालें। यह एक ऐसा मौका हो सकता है जहां आप न केवल इस आघात से उबरें, बल्कि अपने आप को और भी मजबूत, लचीला, और जागरूक पाएं।

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