मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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नई नौकरी का भय और निरंतर चिंता मुझे कैसे संभालूँ

मैं 21 साल का एक युवक हूँ और पिछले कुछ महीनों से एक गहरी चिंता और भय का सामना कर रहा हूँ। यह सब तब शुरू हुआ जब मैंने अपनी पहली नौकरी शुरू की। मैं एक सॉफ्टवेयर डेवलपर हूँ और मेरी टीम में सभी मेरे से कहीं अधिक अनुभवी हैं। हर दिन मुझे लगता है कि मैं कोई गलती कर दूंगा, मेरी क्षमताओं पर सवाल उठेंगे, और मुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। यह डर इतना तीव्र है कि मैं रात को ठीक से सो नहीं पाता, मेरा दिल तेजी से धड़कता रहता है, और कई बार ऑफिस जाने से पहले मुझे उल्टी जैसा महसूस होता है। मैं अपने सहकर्मियों से बातचीत से भी बचने लगा हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे। मैं हमेशा यही सोचता रहता हूँ कि 'क्या मैं इसे संभाल पाऊंगा?' या 'अगर मैं विफल हो गया तो क्या होगा?' इस चिंता ने मेरे निजी जीवन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है; मैं दोस्तों से मिलना कम कर दिया है और मनपसंद शौक भी छोड़ दिए हैं। मैं इस भय और तनाव से कैसे बाहर निकल सकता हूँ? क्या ये लक्षण सामान्य हैं? मैं अपने आत्मविश्वास को कैसे वापस पा सकता हूँ और इस निरंतर डर से कैसे मुक्त हो सकता हूँ?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक युवा सॉफ्टवेयर डेवलपर कार्यालय में चिंतित है, जिसके आसपास अनुभवी सहकर्मियों की छाया है, लेकिन उसकी मेज पर आत्मविश्वास का एक छोटा पौधा उग रहा है।

अर्जुन, आपके द्वारा वर्णित भावनाएँ नई नौकरी की शुरुआत में बिल्कुल सामान्य हैं। कई नए पेशेवरों को अनुभवी टीम के साथ काम करते हुए अपर्याप्तता की भावना का सामना करना पड़ता है। आपके शारीरिक लक्षण, जैसे नींद में खलल, दिल का तेज धड़कना और उल्टी जैसा महसूस होना, तीव्र चिंता के संकेत हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप इन्हें पहचान रहे हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए, आप व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं। पहला कदम है अपनी सोच के पैटर्न को चुनौती देना। जब आप सोचें 'मैं विफल हो जाऊंगा', तो खुद से पूछें कि क्या इसका कोई ठोस सबूत है? क्या आपने कोई छोटी सफलता हासिल की है? वास्तविकता पर आधारित सोच विकसित करने का प्रयास करें। दूसरा, छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं। पूरी परियोजना को एक साथ संभालने के बजाय, दैनिक या साप्ताहिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें। हर छोटी पूर्ति आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी।

तीसरा, सहकर्मियों से संपर्क बनाने का प्रयास करें। याद रखें, हर कोई कभी न कभी नया था। एक सहकर्मी से दोपहर के भोजन पर जाने या किसी तकनीकी समस्या पर सलाह लेने का साहस जुटाएं। अक्सर, दूसरे लोग हमारी कल्पना से कहीं अधिक सहायक होते हैं। चौथा, तनाव प्रबंधन के तरीके अपनाएं। गहरी सांस लेने के व्यायाम, थोड़ी देर की सैर, या ध्यान जैसी तकनीकें दैनिक चिंता को कम करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, अपने शौक और दोस्तों से मिलने को फिर से प्राथमिकता दें; ये आपके मानसिक संतुलन के लिए जरूरी हैं।

अगर ये भावनाएँ और लक्षण कई हफ्तों तक बने रहते हैं और आपकी दैनिक कार्यप्रणाली में बाधा डालते हैं, तो किसी पेशेवर परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक से बात करने पर विचार करें। वे आपको इन चुनौतियों के लिए और अधिक उपकरण और रणनीतियाँ प्रदान कर सकते हैं। याद रखें, आत्मविश्वास समय और अनुभव के साथ बनता है। अपने आप पर दया करें और यह स्वीकार करें कि सीखने की प्रक्रिया में गलतियाँ होना स्वाभाविक है। आपने पहला कदम तो उठा ही लिया है – मदद माँगना।

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