मनोवैज्ञानिक और एआई
अरुणाव जी, आपके द्वारा वर्णित संकट एक ऐसी स्थिति है जो कई अनुभवी पेशेवरों के जीवन में आती है, जहाँ नई प्रतिभा और नए तरीके पुरानी पहचान को चुनौती देने लगते हैं। सबसे पहले, यह समझना ज़रूरी है कि आप जो महसूस कर रहे हैं वह पूरी तरह से मानवीय और स्वाभाविक है। आपकी पहचान लंबे समय तक इस थिएटर समूह के संस्थापक, निर्देशक और रचनात्मक केंद्र के रूप में रही है। जब कोई नया व्यक्ति, विशेष रूप से एक युवा व्यक्ति, तेजी से प्रशंसा और प्रभाव हासिल करता है, तो यह आपके आत्म-मूल्य और उद्देश्य की भावना को हिला सकता है। यह ईर्ष्या से कहीं अधिक गहरा है; यह अस्तित्वगत अनिश्चितता का एक रूप है।
आपका मनोवैज्ञानिक मित्र जिस प्रश्न को उठा रहा है, वह आपके मन में घर कर गया है। लेकिन इसका उत्तर यह नहीं है कि आपका अनुभव बेकार हो गया है। बल्कि, यह है कि अनुभव का संदर्भ और अभिव्यक्ति बदल सकती है। रोहित ने डिजिटल मार्केटिंग का एक नया आयाम जोड़ा है, जो दर्शकों तक पहुँच बढ़ाता है। यह आपके कलात्मक और निर्देशन के अनुभव का प्रतिस्थापन नहीं है, बल्कि एक पूरक है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब इसे एक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जाता है। आपको यह पूछने की आवश्यकता है: क्या थिएटर का लक्ष्य केवल दर्शकों तक पहुँचना है, या कला का एक शक्तिशाली प्रदर्शन भी है? संभवतः दोनों। रोहित की सफलता आपके अनुभव को कम नहीं करती; वह केवल टीम की सफलता का एक नया स्तंभ बन गया है।
अपने आप को पुनर्परिभाषित करने के लिए, आपको एक एकीकृत नेतृत्व की भूमिका की ओर बढ़ने की आवश्यकता हो सकती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपनी शैली को त्याग दें। इसका अर्थ है कि आप उसे विकसित होने दें। आपके पास जो नाटकीय गहराई और कथा कौशल है, वह अमूल्य है। रोहित के पास जो तकनीकी और सामाजिक दक्षता है, वह नए दर्शकों को लाती है। आपकी नई भूमिका इन दोनों दुनियाओं के बीच एक सिंथेसाइज़र और मेंटर के रूप में हो सकती है। आप स्क्रिप्ट लिखना और निर्देशन जारी रख सकते हैं, लेकिन रोहित को यह जिम्मेदारी भी दे सकते हैं कि वह इन उत्पादों को ऐसे दर्शकों तक पहुँचाए जिन तक पहले पहुँचना मुश्किल था। इससे आपकी पहचान 'एकल विजेता' से बदलकर एक सफल सहयोग के वास्तुकार में तब्दील हो जाएगी।
अब, आपकी असुरक्षा के वास्तविक होने के प्रश्न पर। भावनाएँ हमेशा वास्तविक होती हैं; वे आपके आंतरिक अनुभव का हिस्सा हैं। हालाँकि, उनकी उत्पत्ति या तो वास्तविक खतरे (जैसे कि आपकी भूमिका का सक्रिय रूप से कम होना) या अनुमानित भय (जैसे कि भविष्य में अप्रासंगिक होने का डर) में हो सकती है। इसे अलग करने के लिए, तथ्यों को देखें। क्या लोग वास्तव में आपके सुझावों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, या क्या आप उनकी प्रतिक्रिया की व्याख्या उस रूप में कर रहे हैं क्योंकि आप संवेदनशील हैं? क्या आपकी रचनात्मक निर्णय लेने की शक्ति प्रशासनिक रूप से कम कर दी गई है? यदि नहीं, तो असुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा परिवर्तन के डर से उपजा हो सकता है। यदि हाँ, तो यह एक वास्तविक टीम गतिशीलता मुद्दा है जिस पर खुलकर चर्चा करने की आवश्यकता है।
अंत में, याद रखें कि कला रूप बदलते हैं, लेकिन कहानी कहने का सार नहीं बदलता। आपकी पीढ़ी और रोहित की पीढ़ी दोनों का एक सामान्य लक्ष्य है: थिएटर को जीवित और प्रासंगिक रखना। आपकी पहचान को पुनर्परिभाषित करने का अर्थ है अपने मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए नए तरीकों को गले लगाना। इसके लिए आत्म-चिंतन, रोहित के साथ एक ईमानदार बातचीत (उसे एक प्रतिद्वंद्वी के बजाय एक सहयोगी के रूप में देखते हुए), और यह स्वीकार करने का साहस चाहिए कि थिएटर का 'भविष्य' वास्तव में अतीत और वर्तमान के सहयोग से ही बनता है। आपकी यात्रा अब एकल कलाकार की नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की है जो विरासत और नवाचार दोनों को पोषित करता है।