मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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स्वयं को खोजने की जटिल यात्रा: क्या व्यवसाय तनाव और बच्चों के डर ने मुझे रोक दिया?

मैं 45 वर्षों से एक व्यवसाय में हूँ और अब 62 वर्ष की उम्र में खुद को समझने की कोशिश कर रही हूँ। व्यवसाय के तनाव ने मेरी सोच पर काफी असर डाला है और बच्चों की चिंता ने मेरी आत्म-विश्वास को कमजोर किया है। क्या यह संभव है कि पैसे के ब्लॉक और मासूम बच्चों के डर ने मेरे अंदर के असली व्यक्तित्व को दबा दिया हो? मैं अब अपने आप को पहचानने और विकसित करने की दिशा में कैसे कदम बढ़ा सकती हूँ? कृपया ऐसे उपाय सुझाएँ जो मुझे मानसिक शांति और आत्म-स्वीकृति दिला सकें।

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक 62 वर्षीय महिला शांत बगीचे में आत्म-चिंतन करते हुए, जर्नल पकड़े हुए, तनाव से शांति की ओर बढ़ते हुए कोमल जलरंग शैली में।

प्रिय सरोज़, आपका प्रश्न एक गहन आत्म-खोज की यात्रा को दर्शाता है जो कई वयस्कों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 62 वर्ष की आयु में स्वयं को समझने का प्रयास एक साहसिक और सम्मानजनक कदम है। यह पूर्णतः संभव है कि दीर्घकालिक व्यवसायिक तनाव और पैतृक चिंताओं ने, जिन्हें आप पैसे के ब्लॉक और बच्चों के डर के रूप में देखती हैं, आपके आत्म-विश्वास और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रभावित किया हो। अक्सर, जीवन की जिम्मेदारियाँ हमें एक ऐसी भूमिका में धकेल देती हैं जहाँ हमारी अपनी पहचान, रुचियाँ और आकांक्षाएँ पृष्ठभूमि में चली जाती हैं। यह दमन नहीं, बल्कि जीवन के प्रति एक समर्पण का प्रतीक हो सकता है।

अपने आप को पुनः खोजने और विकसित करने की दिशा में पहला कदम सजग आत्म-अवलोकन है। प्रतिदिन कुछ समय निकालकर अपने विचारों और भावनाओं को, बिना निर्णय के, सिर्फ देखने का अभ्यास करें। यह आपको उन आंतरिक आवाजों से परिचित कराएगा जो शायद लंबे समय से दबी हुई थीं। दूसरा, अतीत के अनुभवों को समेटना महत्वपूर्ण है। आपके व्यवसायिक संघर्ष और पारिवारिक चिंताएँ आपकी ताकत और लचीलेपन का प्रमाण हैं। इन्हें कमजोरी के स्थान पर, आपके चरित्र के निर्माण खंड के रूप में देखने का प्रयास करें। तीसरा, नई गतिविधियों या पुरानी रुचियों की खोज करें। यह कोई छोटा सा शौक भी हो सकता है, जैसे लेखन, चित्रकला, प्रकृति में समय बिताना, या कोई नया कौशल सीखना। यह आपको अपने भीतर के उस व्यक्ति से जुड़ने का अवसर देगा जो केवल कर्तव्यों से परे है।

मानसिक शांति और आत्म-स्वीकृति के लिए, दयालु आत्म-वार्ता का अभ्यास आवश्यक है। वे शब्द जो आप स्वयं से कहती हैं, वे बहुत शक्तिशाली होते हैं। अपने आप से वैसी ही दयालुता और प्रोत्साहन से बात करें जैसी आप किसी प्रिय मित्र से करतीं। साथ ही, वर्तमान क्षण में जीने का अभ्यास या माइंडफुलनेस, तनाव को कम करने और आत्म-स्वीकृति को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। याद रखें, यह यात्रा रेस नहीं है। छोटे, स्थिर कदम अक्सर सबसे टिकाऊ परिवर्तन लाते हैं। यदि आपको लगे कि यह भारी हो रहा है, तो किसी मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से पेशेवर मार्गदर्शन लेना एक बुद्धिमानी भरा निर्णय हो सकता है, जो एक सुरक्षित और समर्थनपूर्ण स्थान प्रदान कर सकता है। आपका यह आत्म-खोज का सफर आपको एक नए स्तर की आंतरिक शांति और आत्म-ज्ञान की ओर ले जा सकता है।

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