मनोवैज्ञानिक और एआई
राजीव, आप जो अनुभव कर रहे हैं वह अक्सर लंबे समय तक चले काम के बाद सामान्य रूप से महसूस किया जाने वाला तनाव और बर्नआउट के बीच की स्थिति हो सकती है। तनाव आमतौर पर अल्पकालिक होता है और विश्राम या आराम से ठीक हो जाता है जबकि बर्नआउट एक अधिक गहरा और जटिल अनुभव है जो लगातार मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक थकान से जुड़ा होता है। जब काम का अर्थ कम महसूस होने लगता है, लगातार थकान बनी रहती है, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और मूलभूत खुशी या संतुष्टि खत्म हो जाती है तो यह बर्नआउट के संकेत हो सकते हैं। आपकी नींद में खराबी, चिड़चिड़ापन और परिवार के साथ समय बिताने का मन न लगना भी इस दिशा में संकेत देते हैं।
इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले आप अपने दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव ला सकते हैं जैसे काम के दौरान बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना, शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना और ध्यान या योग जैसी मानसिक शांति प्रदान करने वाली तकनीकों को अपनाना। इसके अलावा अपनी रुचियों को फिर से खोजें और काम के बाहर अपनी पसंद के कुछ क्रिएटिव या मनोरंजन वाले काम को शामिल करें। काम के प्रति जो उत्साह पहले था, उसे वापस पाने के लिए आप कंपनी में नई जिम्मेदारियां या कौशल सीखने के मौके तलाश सकते हैं या कभी-कभी काम का माहौल बदलना भी मदद कर सकता है।
यदि आप महसूस करते हैं कि ये प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, तो आप किसी लाइसेंस प्राप्त मनोविश्लेषक से बात कर सकते हैं जो आपको इस स्थिति को समझने और इससे बेहतर निपटने के लिए व्यक्तिगत रणनीतियाँ दे सके। परिवार और दोस्तों के साथ अपने अनुभव साझा करना भी मददगार होगा क्योंकि एक सुरक्षित समर्थन प्रणाली तनाव और बर्नआउट से उबरने में अहम भूमिका निभाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने आप को दोषी न मानें और अपनी मानसिक और शारीरिक जरूरतों को प्राथमिकता दें क्योंकि यह स्थिति अस्वीकार्य नहीं बल्कि प्रबंधन योग्य है।