मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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स्थिर जीवन में भी लगातार खालीपन और काम के प्रति उदासीनता, क्या करें?

मैं 40 वर्ष का पुरुष हूँ, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर। पिछले दो साल से मैं एक ही कंपनी में काम कर रहा हूँ, लेकिन अब हर सुबह ऑफिस जाने का विचार ही मुझे भारी और निरर्थक लगता है। मेरे पास एक स्थिर नौकरी, एक प्यार करने वाला परिवार है, फिर भी मैं लगातार खालीपन और उदासीनता महसूस करता हूँ। काम पर मेरी उत्पादकता बहुत गिर गई है, मैं नई टीमों में शामिल होने या नई परियोजनाओं पर काम करने से बचता हूँ। शाम को घर आकर भी मैं कुछ करने का मन नहीं करता, बस टीवी देखता रहता हूँ या फोन स्क्रॉल करता रहता हूँ। पहले जो शौक थे, जैसे गिटार बजाना या किताबें पढ़ना, उनमें भी अब कोई दिलचस्पी नहीं रही। क्या यह सिर्फ कार्य तनाव है या कुछ और? मैं इस उदासीनता और ऊर्जा की कमी से कैसे बाहर निकल सकता हूँ?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक 40 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑफिस में अपने डेस्क पर बैठा है, उदास और निरुत्साहित महसूस कर रहा है। उसके आसपास की चीज़ें, जैसे गिटार और किताबें, उपेक्षित पड़ी हैं।

खालीपन और काम के प्रति उदासीनता महसूस होना सामान्यतः कार्य तनाव से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले, अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव लाना जरूरी है। रोजाना ऑफिस जाने के लिए खुद को प्रेरित करने के लिए अपने काम में छोटे नए लक्ष्य निर्धारित करें। इससे आपके अंदर एक दिशा और उद्देश्य का भाव जागेगा। यदि आप नई टीमों या परियोजनाओं में भाग लेने से बच रहे हैं, तो छोटी शुरुआत करें, जहाँ ज्यादा दबाव न हो। घर पर भी अपनी रुचियों को पुनः जगाने के लिए दैनिक कुछ समय निकालें, भले वह गिटार बजाना हो या किताबें पढ़ना, शुरुआत में कम समय के लिए ही सही। अपनी गतिविधियों में बदलाव और छोटे-छोटे लक्ष्य आपकी ऊर्जा और जिज्ञासा को बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा, अपने दिनचर्या में नियमित व्यायाम या योग को शामिल करें, क्योंकि शारीरिक सक्रियता मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। सामाजिक संपर्क बनाए रखें, परिवार और मित्रों के साथ खुले दिल से बातचीत करें जिससे आपको सहारा और मानसिक शांति मिल सकती है। ध्यान रखें कि अत्यधिक फोन या टीवी स्क्रॉलिंग आपकी मानसिक थकान को बढ़ा सकती है इसलिए इन्हें नियंत्रित करना लाभदायक होगा।

यदि ये प्रयासों के बाद भी उदासीनता, ऊर्जा की कमी और खालीपन की भावना बनी रहती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपको किसी मनोवैज्ञानिक सलाहकार से मिलना चाहिए। वे आपकी समस्या की जड़ों को समझकर आपको अधिक उपयुक्त सहायता प्रदान कर सकते हैं।

इस प्रकार, अपने काम और निजी जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें, कुछ नए अनुभवों पर ध्यान दें, सक्रिय जीवनशैली अपनाएं और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने में संकोच न करें।

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