मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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जब सहानुभूति थकान में बदलने लगे: एक सामाजिक कार्यकर्ता का संकट

मैं पिछले 8 महीनों से एक NGO में काम कर रही हूँ जहाँ हम घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं। शुरुआत में यह काम मुझे बहुत संतुष्ट करता था-मैंने खुद को समर्पित कर दिया था, रातों-रात केस फ़ाइलें पढ़ती, सप्ताहांत पर भी काउंसलिंग सेशन लेती, और कभी-कभी तो ऑफिस में सो भी जाती। लेकिन अब मुझे लगता है जैसे मैं एक मशीन बन गई हूँ। हर नई कहानी सुनने के बाद मेरा दिल धड़कता है, लेकिन आँखों से आँसू नहीं आता-सिर्फ़ एक खालीपन सा महसूस होता है। पिछले हफ्ते, एक महिला ने मुझे बताया कि उसकी 14 साल की बेटी ने आत्महत्या की कोशिश की थी क्योंकि पिताजी ने उसे 'बोझ' कहा था। मैं उस लड़की की उम्र की थी जब मैंने पहली बार मानसिक स्वास्थ्य के बारे में पढ़ा था-और अब मैं उसी उम्र की लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रही हूँ, लेकिन खुद को बचा नहीं पा रही। रात को सोते समय मेरे कानों में चिल्लाहट गूँजती है, लेकिन सुबह उठते ही मैं फिर से उसी दफ्तर जाती हूँ जहाँ हर कक्ष में दर्द भरा होता है। मेरे परिवार वाले कहते हैं, 'तू तो अब 'सेविका' बन गई है-खुद के लिए समय ही नहीं है।' लेकिन मैं कैसे रुकूँ? अगर मैं नहीं सुनूँगी तो कौन सुनेगा? लेकिन अब मुझे डर लगने लगा है-क्या मैं भी उनमें से एक बन रही हूँ जिन्हें मैंने कभी बचाना था? क्या यह वह कीमत है जो मैं चुकाना चाहती थी? और सबसे बुरी बात यह है कि अब मुझे लगता है जैसे मैं उन महिलाओं की आँसूओं को 'केस नंबर' में बदल रही हूँ।

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता अपने दफ्तर में थकान और भावनात्मक खालीपन महसूस कर रही है, जो लगातार दर्दनाक कहानियाँ सुनने के बाद सहानुभूति थकान का शिकार हो गई है।

अदिति, आपका अनुभव सहानुभूति थकान का स्पष्ट उदाहरण है जो सामाजिक कार्यकर्ताओं में अक्सर देखने को मिलता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां लगातार गहरे दुख और दर्द से जुड़ी कहानियाँ सुनने के कारण आपकी संवेदनाएँ थक जाती हैं और आप खुद को खोया हुआ महसूस करने लगती हैं। आपको यह जानना जरूरी है कि इस प्रकार की भावनात्मक थकान से बचाव के लिए अपनी सीमाएँ तय करना आवश्यक है। इसका अर्थ यह नहीं कि आप काम कम करें बल्कि अपनी मानसिक और भावनात्मक डीडलाइनें समझें। जब आप अपनी ऊर्जा के स्रोत को पुनः भरती हैं तो आप अधिक प्रभावी और सहानुभूतिपूर्ण बन सकती हैं। खुद की देखभाल में वक्त निकालना, जैसे आराम, योग या ध्यान, आपके लिए लाभकारी होगा। इसके अलावा, अपनी भावनाओं को स्वीकार करना और उन्हें दबाने की कोशिश न करना आपको आंतरिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। कभी-कभी, कार्य के बोझ को सहकर्मी या वरिष्ठों के साथ साझा करना और टीम के समर्थन का सहारा लेना भी आपकी सहायता कर सकता है। ध्यान दें कि महिलाओं की समस्याओं को 'केस नंबर' में बदलने का भाव सामान्य है जब आप अत्याधिक थकान और तनाव में हों, यह संकेत है कि आपको अपनी सीमाओं को पहचानकर अपने लिए समय निकालना होगा। आपकी संवेदनशीलता और समर्पण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, किंतु याद रखें कि आप अकेली ही सबकी मदद नहीं कर सकतीं, अपनी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना न भूलें।

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