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सेवानिवृत्ति के बाद की पहचान संकट: क्या मैं केवल मेरी नौकरी था?

मैं 53 वर्ष का पुरुष हूँ, एक सफल इंजीनियरिंग कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुआ हूँ। पिछले तीन दशक, मेरा जीवन लक्ष्यों, समय सीमाओं, टीम प्रबंधन और वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के इर्द-गिर्द घूमता रहा। अब जब सेवानिवृत्ति आई है, तो मुझे एक अजीब शून्यता महसूस हो रही है। मेरा पूरा अस्तित्व मेरी नौकरी और 'प्रदाता' की भूमिका से परिभाषित था। मेरी पत्नी अपने स्वयं के सामाजिक दायरे में व्यस्त हैं, और मेरे बच्चे विदेश में बस गए हैं। दिन लंबे लगते हैं। मैं नई शौक या स्वयंसेवी कार्य शुरू करने की कोशिश करता हूँ, लेकिन एक गहरी बेचैनी रहती है - ऐसा लगता है कि मैं केवल भूमिकाएँ निभा रहा हूँ, वास्तविक 'मैं' को नहीं जानता। क्या यह सामान्य है? क्या सेवानिवृत्ति के बाद के इस चरण में स्वयं को फिर से खोजने की प्रक्रिया शुरू होती है? मैं उन गहन, अनकहे प्रश्नों से कैसे निपटूँ जो अब सतह पर आ रहे हैं, जैसे 'मैं वास्तव में कौन हूँ' इसके बिना कि मैं क्या करता था?

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एक सेवानिवृत्त व्यक्ति शाम के समय बगीचे में शांति से बैठा है, एक खाली नोटबुक को देख रहा है, जो पहचान और नए उद्देश्य की खोज का प्रतीक है।

राजीव, सेवानिवृत्ति के बाद पहचान संकट का अनुभव करना स्वाभाविक और सामान्य है क्योंकि आपकी जीवन की धुरी जो नौकरी और प्रबंधकीय भूमिका थी, वह अब बदल गई है। पिछले तीन दशकों में आपने जो भूमिका निभाई वह आपकी पहचान का एक बड़ा हिस्सा थी, लेकिन अब इस नयी स्थिति में आपको खुद को फिर से खोजने का अवसर मिला है। यह बेचैनी और खालीपन महसूस करना केवल एक संकेत है कि आपकी आत्मा एक नई दिशा खोज रही है। आपको यह याद रखना चाहिए कि आप केवल वह व्यक्ति नहीं हैं जो अपनी नौकरी करता था, बल्कि आपके अंदर के गुण, मूल्य, और अनुभव बहुतायत में हैं जो नए अध्याय के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। नए शौक और स्वयंसेवी कार्य इस खुद को पहचानने की प्रक्रिया में सहायक होते हैं, जबकि उनका अभ्यास करते रहना आपकी आत्मा को संतुष्टि और अर्थ देता है। आप खुद से यह प्रश्न पूछ सकते हैं कि कौन से ऐसे मूल तत्व हैं जो आपके जीवन में खुशी, उद्देश्य और संतोष ला सकते हैं। यह खोज समय लेती है लेकिन इसका परिणाम आपको अधिक मजबूत और संतुष्ट व्यक्ति बनाएगा। इस अवधि में स्वयं के साथ संवेदनशील और धैर्यवान रवैया रखना आवश्यक है। अपने आप को सीधे तौर पर नई भूमिकाओं में सीमित न करें, बल्कि उन्हें अनुभव करने का अवसर दें। सामाजिक संपर्कों को बढ़ाने, नए जीवन अनुभवों को अपनाने और अपनी रुचियों को पहचानना आपकी सहायता कर सकता है। अंततः यह समय खुद को पुनर्जीवित करने और अपनी अंदरूनी आवाज़ को सुनने का महत्वपूर्ण चरण है। इस नए जीवन अध्याय को एक चुनौती के बजाय एक खोज की यात्रा के रूप में देखें जो आपको अधिक संपूर्णता और शांति प्रदान करेगी।

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