मनोवैज्ञानिक और एआई
प्रिय राजेश, आपके द्वारा वर्णित भावनाएँ और अनुभव निश्चित रूप से चिंताजनक हैं और इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। आपके लक्षण, जैसे निरंतर थकान, चिड़चिड़ापन, और पहले आनंददायक गतिविधियों में रुचि की कमी, बर्नआउट के संकेतों से मिलते-जुलते हैं, जो अक्सर काम से जुड़ा होता है। हालाँकि, सेवानिवृत्ति, अकेलापन और शोक जैसे जीवन के बड़े बदलाव भी ऐसी भावनाओं को जन्म दे सकते हैं। यह केवल उम्र का सामान्य असर नहीं प्रतीत होता।
आपका स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग संभवतः एक लक्षण है, न कि कारण। यह अकेलेपन और खालीपन से बचने का एक तरीका बन सकता है, लेकिन यह अक्सर वास्तविक संतुष्टि नहीं देता और नकारात्मक भावनाओं को बढ़ा सकता है। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए, छोटे-छोटे, प्रबंधनीय कदम उठाना महत्वपूर्ण है। दिनचर्या बनाना एक शुरुआती बिंदु हो सकता है, जैसे नियमित समय पर उठना और टहलने जाना।
पुराने शौक जैसे पढ़ना या बागवानी में वापसी के लिए, छोटी शुरुआत करें। पाँच मिनट के लिए एक किताब पढ़ें या एक पौधे की देखभाल करें। सामाजिक संपर्क बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। पूर्व सहकर्मियों, पड़ोसियों या स्थानीय समूहों से जुड़ने का प्रयास करें। यदि संभव हो, तो स्वैच्छिक कार्य में शामिल होना आपको उद्देश्य की भावना दे सकता है।
स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने के लिए, विशिष्ट समय निर्धारित करें और बिस्तर पर जाने से पहले इसके उपयोग से बचें। अपनी भावनाओं को एक डायरी में लिखना भी मददगार हो सकता है। यदि ये लक्षण बने रहते हैं या बढ़ जाते हैं, तो एक पेशेवर परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक से बात करना एक बहुत ही सकारात्मक कदम होगा। वे आपको इन भावनाओं को समझने और नए सामंजस्य बनाने में मार्गदर्शन कर सकते हैं। आप अकेले नहीं हैं, और सहायता लेना ताकत का प्रतीक है।