मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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56 वर्षीय सेवानिवृत्त पुरुष अकेलेपन, थकान और स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से जूझ रहा है, क्या यह बर्नआउट है?

मैं 56 वर्ष का एक पुरुष हूँ, एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक। पिछले कुछ महीनों से मैं अत्यधिक तनाव और थकान महसूस कर रहा हूँ। मेरे बच्चे अब बड़े होकर दूसरे शहरों में रहते हैं, और मेरी पत्नी का निधन दो साल पहले हो गया था। अकेलापन और दैनिक कार्यों में रुचि की कमी ने मुझे एक खालीपन से भर दिया है। मैं सुबह उठने के लिए भी प्रेरित नहीं हो पाता, और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता हूँ। मेरे पास खाली समय बहुत है, लेकिन मैं अपने पुराने शौक जैसे पढ़ना या बागवानी में भी मन नहीं लगा पा रहा। क्या यह सिर्फ उम्र का असर है, या क्या मैं बर्नआउट का शिकार हो रहा हूँ? मैं अपने स्मार्टफोन पर बहुत समय बिताने लगा हूँ, जिससे मुझे और अधिक खालीपन महसूस होता है। मैं इस स्थिति से कैसे बाहर निकल सकता हूँ?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक सेवानिवृत्त शिक्षक शाम के समय बगीचे में अकेले बैठे हैं, उदास मनःस्थिति में स्मार्टफोन देख रहे हैं, जो अकेलेपन और रुचि की कमी को दर्शाता है।

प्रिय राजेश, आपके द्वारा वर्णित भावनाएँ और अनुभव निश्चित रूप से चिंताजनक हैं और इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। आपके लक्षण, जैसे निरंतर थकान, चिड़चिड़ापन, और पहले आनंददायक गतिविधियों में रुचि की कमी, बर्नआउट के संकेतों से मिलते-जुलते हैं, जो अक्सर काम से जुड़ा होता है। हालाँकि, सेवानिवृत्ति, अकेलापन और शोक जैसे जीवन के बड़े बदलाव भी ऐसी भावनाओं को जन्म दे सकते हैं। यह केवल उम्र का सामान्य असर नहीं प्रतीत होता।

आपका स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग संभवतः एक लक्षण है, न कि कारण। यह अकेलेपन और खालीपन से बचने का एक तरीका बन सकता है, लेकिन यह अक्सर वास्तविक संतुष्टि नहीं देता और नकारात्मक भावनाओं को बढ़ा सकता है। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए, छोटे-छोटे, प्रबंधनीय कदम उठाना महत्वपूर्ण है। दिनचर्या बनाना एक शुरुआती बिंदु हो सकता है, जैसे नियमित समय पर उठना और टहलने जाना।

पुराने शौक जैसे पढ़ना या बागवानी में वापसी के लिए, छोटी शुरुआत करें। पाँच मिनट के लिए एक किताब पढ़ें या एक पौधे की देखभाल करें। सामाजिक संपर्क बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। पूर्व सहकर्मियों, पड़ोसियों या स्थानीय समूहों से जुड़ने का प्रयास करें। यदि संभव हो, तो स्वैच्छिक कार्य में शामिल होना आपको उद्देश्य की भावना दे सकता है।

स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने के लिए, विशिष्ट समय निर्धारित करें और बिस्तर पर जाने से पहले इसके उपयोग से बचें। अपनी भावनाओं को एक डायरी में लिखना भी मददगार हो सकता है। यदि ये लक्षण बने रहते हैं या बढ़ जाते हैं, तो एक पेशेवर परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक से बात करना एक बहुत ही सकारात्मक कदम होगा। वे आपको इन भावनाओं को समझने और नए सामंजस्य बनाने में मार्गदर्शन कर सकते हैं। आप अकेले नहीं हैं, और सहायता लेना ताकत का प्रतीक है।

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