मनोवैज्ञानिक और एआई
तुम्हारी स्थिति में जो असहायता और डर महसूस हो रहा है, वह पूरी तरह से स्वाभाविक है। 12 साल बाद पिता की वापसी न सिर्फ एक अचानक परिवर्तन है, बल्कि उनके साथ उनके उसी हिंसक और अनियंत्रित व्यवहार की वापसी भी है, जिसे तुमने बचपन में सहा है। अब जब तुम वयस्क हो, तो यह जिम्मेदारी और भी भारी लगती है-क्योंकि तुम न सिर्फ अपने लिए, बल्कि अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों की सुरक्षा के लिए भी चिंतित हो। इस स्थिति में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि तुम अकेले नहीं हो और तुम्हारे पास कई ऐसे विकल्प हैं, जो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इस संकट से निकालने में मदद कर सकते हैं।
पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि तुम अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दो। तुम्हारे पिता का व्यवहार न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला है, बल्कि शारीरिक रूप से भी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में यदि तुम महसूस करते हो कि उनकी हिंसा से तुरंत खतरा है, तो पुलिस को बुलाना या स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करना एक वैध और आवश्यक कदम है। कई लोग सोचते हैं कि परिवार का मामला पुलिस तक नहीं ले जाना चाहिए, लेकिन जब सुरक्षा का सवाल हो, तो कानून तुम्हारा समर्थन करता है। तुम अपने राज्य या शहर की महिला हेल्पलाइन (जैसे 1090, 181) या बाल हेल्पलाइन (1098) पर कॉल कर सकते हो, जो घरेलू हिंसा के मामलों में तुरंत मदद करती हैं। यदि तुम चाहते हो, तो बिना अपने पिता को बताए भी पुलिस को स्थिति से अवगत करा सकते हो और उन्हें घर से बाहर निकालने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले सकते हो।
दूसरा, तुम अपनी माँ से खुले और सहानुभूति से बात करो, लेकिन ऐसा तब जब तुम्हारे पिता घर पर न हों। उन्हें यह एहसास दिलाओ कि तुम उनकी और भाई-बहनों की सुरक्षा के लिए चिंतित हो, न कि उनके खिलाफ कुछ करने के लिए। हो सकता है कि वे डर या सामाजिक दबाव के कारण चुप रह रही हों, लेकिन यदि तुम उन्हें यह समझाओ कि उनके चुप रहने से बच्चों का भविष्य खतरे में है, तो वे तुम्हारे साथ मिलकर कोई कदम उठाने को तैयार हो सकती हैं। उन्हें यह भी बताओ कि तुम उनके साथ हो और उन्हें अकेले इस संकट से लड़ने की जरूरत नहीं है। यदि तुम्हारे पिता के पास घर का मालिकाना हक नहीं है, तो तुम कानूनी सलाह ले सकते हो कि उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए कैसे कहा जाए। कई महिला संरक्षण केंद्र या एनजीओ मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।
तीसरा, तुम्हारे छोटे भाई-बहन इस समय सबसे अधिक असुरक्षित हैं। तुम्हारे 9 साल के भाई ने स्कूल जाना बंद कर दिया है, जो एक गंभीर संकेत है कि उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। तुम्हें तुरंत किसी बाल मनोवैज्ञानिक या स्कूल काउंसलर से संपर्क करना चाहिए, ताकि उनके डर और आघात को समझा जा सके। यदि तुम चाहो, तो उन्हें कुछ समय के लिए किसी सुरक्षित स्थान (जैसे रिश्तेदारों के घर) पर भेज सकते हो, जहां वे इस हिंसा से दूर रह सकें। तुम्हारा 14 साल का भाई-बहन भी इस उम्र में बहुत संवेदनशील है और हो सकता है कि वह अपने पिता के व्यवहार को सामान्य समझने लगे। तुम्हें उनकी देखभाल करनी होगी और उन्हें यह समझाना होगा कि हिंसा कभी भी स्वीकार्य नहीं है-चाहे वह पिता ही क्यों न हो।
चौथा, तुम खुद भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हो। तुमने लिखा है कि तुम्हारे पिता के सामने तुम फिर से वही छोटा बच्चा बन जाते हो, जो डर के मारे कोने में बैठा रहता था। यह ट्रॉमा की पुनरावृत्ति है और इसका मतलब है कि तुम्हारे अंदर अभी भी वे घाव हैं, जो भरने की जरूरत है। तुम्हें किसी experienced मनोवैज्ञानिक से मिलना चाहिए, जो घरेलू हिंसा और बचपन के आघात को समझता हो। यह तुम्हारी कमजोरी नहीं, बल्कि तुम्हारी ताकत होगी, क्योंकि इससे तुम बेहतर ढंग से अपने परिवार का समर्थन कर पाओगे। यदि तुम खुद इस स्थिति में फंसकर महसूस करते हो, तो थोड़े समय के लिए घर से दूर जाने का भी विचार कर सकते हो-लेकिन इससे पहले यह सुनिश्चित कर लो कि तुमारी माँ और भाई-बहन सुरक्षित हैं।
पांचवा, यदि तुम्हारे पिता को शराब की लत है, तो यह एक ऐसी समस्या है, जिसे केवल उनका इलाज करा सकते हो-लेकिन इसके लिए उनकी स्वेच्छा आवश्यक है। यदि वे मदद लेने को तैयार नहीं हैं, तो तुम उनकी मदद नहीं कर सकते। ऐसे में तुम्हारा पहला कर्तव्य अपने परिवार की सुरक्षा है। तुम डीकडेंस (De-addiction) केंद्रों से संपर्क कर सकते हो, जो परिवारों को ऐसी स्थितियों में मार्गदर्शन देते हैं, लेकिन याद रखो कि उनकी मदद केवल तब संभव है जब वे स्वयं बदलना चाहें।
अंत में, यह याद रखो कि तुम इस स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं हो। तुम्हारे पिता का व्यवहार उनकी अपनी समस्या है, और तुमसे उम्मीद नहीं की जा सकती कि तुम उनकी हरकतों को ठीक करो। तुम्हारे पास यह विकल्प है कि तुम इस चक्र को तोड़ो-चाहे पुलिस की मदद लेकर, कानूनी कार्रवाई कर, या फिर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम और तुम्हारे भाई-बहन हिंसा को सामान्य न समझो और यह विश्वास रखो कि तुम बेहतर जीवन के हकदार हो। यदि तुम अब कुछ नहीं करोगे, तो यह डर सच हो सकता है कि तुम्हारे छोटे भाई-बहन भी इस हिंसा को स्वीकार कर लेंगे या स्वयं हिंसक बन जाएंगे। लेकिन यदि तुम कदम उठाओगे, तो तुम न सिर्फ उनकी रक्षा करोगे, बल्कि उन्हें यह सिखाओगे कि सुरक्षा और सम्मान के बिना जीवन जीना जरूरी नहीं है।
इन सबके बीच, अपने आप को दोष मत दो। तुमने अब तक जो किया है, वह काफी है-तुमने अपनी माँ का साथ दिया है, अपने भाई-बहनों की परवरिश में मदद की है, और अब भी तुम उनकी रक्षा के लिए सोच रहे हो। अब समय है कि तुम सहायता मांगो-चाहे वह कानूनी हो, मानसिक हो, या सामाजिक हो। याद रखो, मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है।
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