मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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बार बार पेशेवर असफलता और आत्म संदेह से कैसे उबरें

मैं 56 वर्षीया एक महिला हूँ, और मैंने एक ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक परामर्श पोर्टल शुरू किया है। मेरा चरित्र एक अनुभवी और करुणामयी मनोचिकित्सक का है, जिसने दशकों तक विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों की मदद की है। मैं विशेष रूप से वयस्कों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन संकटों और आघात से निपटने में मदद करती हूँ। मेरा प्रश्न यह है: जब कोई व्यक्ति अपने पेशेवर जीवन में बार-बार असफलताओं का सामना करने के बाद गहरे आत्म-संदेह और अवसाद में चला जाता है, तो उसे कैसे समझाएं कि ये असफलताएँ उसकी पहचान नहीं हैं? विशेष रूप से, मान लीजिए एक 45 वर्षीय व्यक्ति जिसने अपना व्यवसाय खो दिया, तलाक का सामना किया, और अब नौकरी के लिए आवेदनों में लगातार अस्वीकृति मिल रही है। वह खुद को एक 'पूर्ण विफलता' के रूप में देखने लगा है और भविष्य के लिए कोई लक्ष्य नहीं बना पा रहा है। ऐसी स्थिति में, पेशेवर आत्म-प्राप्ति की ओर वापसी के लिए लक्ष्य विज़ुअलाइज़ेशन और अन्य तकनीकों का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

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मनोवैज्ञानिक और एआई

एक करुणामयी मनोचिकित्सक एक निराश व्यक्ति को उसके भविष्य के लक्ष्यों की कल्पना करने और आत्म-संदेह से उबरने में मदद कर रही है।

जब कोई व्यक्ति बार-बार पेशेवर असफलताओं का सामना करता है और गहरे आत्म-संदेह और निराशा से जूझने लगता है, तो सबसे पहले यह समझाना महत्वपूर्ण है कि असफलताएँ उसकी पहचान नहीं हैं, बल्कि वे केवल उसके अनुभव का हिस्सा हैं। हमें उन्हें अपनी योग्यता, मूल्य या भविष्य की क्षमता के संकेत के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह समझाना जरूरी है कि जीवन में परिवर्तन और उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, और अक्सर असफलताएँ नई सीख और अवसरों का मार्ग खोलती हैं।

विशेष रूप से जब कोई व्यक्ति, जैसे कि यहाँ वर्णित 45 वर्षीया जो अपने व्यवसाय और वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहा है, वह अपने आप को पूरी तरह विफल मानने लगता है, तो उसे यह एहसास दिलाना चाहिए कि इसका अर्थ यह नहीं कि उसका भविष्य भी ऐसा ही होगा। वह अभी भी अपनी क्षमताओं और संभावनाओं को नई दिशा दे सकता है।

इस प्रक्रिया में, लक्ष्य विज़ुअलाइज़ेशन एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है। व्यक्ति को शांत और सुरक्षित वातावरण में बैठाकर उससे अपने सकारात्मक भविष्य की कल्पना करने को कहें। यह कल्पना इस तरह होनी चाहिए जिसमें वह सफलता, आत्मविश्वास और संतुष्टि महसूस करता हो। विज़ुअलाइज़ेशन में न केवल परिणामों पर ध्यान देना चाहिए बल्कि उन कदमों पर भी जो उसे वहाँ पहुंचाने हैं। इसे नियमित रूप से करना चाहिए ताकि दिमाग नए विश्वास और उम्मीदों के साथ मजबूत हो।

इसके साथ ही, व्यक्ति को छोटे और वास्तविक लक्ष्यों को निर्धारित करना चाहिए जो उसे पुनः सक्रिय करने और सफलता का अनुभव कराते हैं। छोटे लक्ष्य पाने से उसे आत्म-प्राप्ति और नियंत्रण की भावना विकसित होगी। जब कोई बड़ा लक्ष्य बड़ा लगने लगे, तो उसे छोटे हिस्सों में बाँटना चाहिए ताकि वह आसानी से प्रगति देख सके।

अपनी भावनाओं को रिकॉर्ड करना या कृतज्ञता डायरी बनाना भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने में मदद करता है, क्योंकि यह व्यक्ति को उसकी उपलब्धियों और सकरात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करता है।

साथ ही, सामाजिक समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भरोसेमंद मित्र, परिवार के सदस्य या जैसे परामर्शदाता से खुलकर बात करने से व्यक्ति के विचारों को स्पष्टता मिलती है और वह अकेला महसूस नहीं करता। कभी-कभी केवल स्वयं के अनुभव साझा करने से ही मानसिक बोझ कम हो जाता है।

अंत में, अपनी पहचान को पूरी तरह से अपने काम, संबंधों या किसी एक भूमिका से जोड़ना टालना चाहिए क्योंकि व्यक्ति की पहचान उसके गुणों, अनुभवों और संभावनाओं का समावेश होती है, न कि केवल उसकी असफलताओं का। धैर्य रखना और निरंतर छोटे कदमों के माध्यम से आगे बढ़ना ही वास्तविक पुनर्निर्माण की शुरुआत होती है।

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