मनोवैज्ञानिक और एआई
अर्जुन, आप जिसके बारे में बात कर रहे हैं वह रात की ऑनलाइन स्क्रॉलिंग की आदत न केवल आदत बन गई है, बल्कि वह Hartford disease like behavior मे बदल गई है. यह समस्या आम है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है. पहला कदम यह समझना है कि यह आदत क्यों पनपी है. अधिकतर लोग रात को ऑनलाइन सामग्री देखते हैं क्योंकि उनका दिमाग शांत नहीं होता, या उन्हें नींद आने में दिक्कत होती है. व्यस्त दिमाग को आराम देने के लिए वे ऑनलाइन जगत में खो जाते हैं, लेकिन इससे अनिद्रा और कम կազմी नींद होती है.
इसलिए, आपको सोने से पहले के रूटीन में बदलाव लाने की जरूरत है. सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रहें. इसके बजाय, कोई किताब पढ़ें, हल्की स्ट्रेचिंग करें, या ध्यान करें. डिजिटल डिटोक्स का अभ्यास करें, अर्थात सोने के कमरे में मोबाइल या टैब न रखें. आप एक नियोजित समय तय करें, जैसे रात 10 बजे के बाद कोई स्क्रीन नहीं. शुरुआत में इसे पालन करना कठिन हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाएगी.
अगर आपको लगा कि यह Artefact of addiction है, तो आपको वर्णनात्मक चिकित्सा या संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा की मदद लेनी चाहिए. लेकिन चूंकि आपने इसके बारे में बात नहीं की, तो मैं इसे छोड़ दूंगी. आप अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताएं, जिसके कारण आपकी सामाजिक जुड़ाव बढ़ेगा और आपको इस आदत से दूर रहने में मदद मिलेगी.
अगला कदम है लक्ष्य निर्धारण. নিজे से वादा करें कि आप हर हफ्ते एक घंटा कम स्क्रॉलिंग करें. छोटे-छोटे लक्ष्य राखें और उन्हें प्राप्त करने पर स्वयं को पुरस्कृत करें. स्व-निरीक्षण करें कि कौन से समय पर आप अधिक ऑनलाइन रहते हैं और क्यों. कागज पर लिख लें, इससे आपको आत्म-जागरूकता मिलेगी.
अंत में, याद रखें कि मेहनत और धैर्य के साथ आप इस आदत को तोड़ सकते हैं. अगर आपको लगा कि यह समस्या बहुत गहरी है तो कृपया एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक से मिले.