मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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मध्यम आयु में आत्मविश्वास की कमी और अपनी पहचान खोने का डर

मैं 52 वर्ष की महिला हूँ। पिछले कुछ वर्षों से मुझे लगता है कि मेरा आत्मविश्वास लगातार कम हो रहा है। मैं एक गृहिणी हूँ, मेरे बच्चे बड़े होकर अलग रहने लगे हैं। अब मुझे अक्सर ऐसा लगता है कि मेरी कोई पहचान नहीं रह गई है, मैं सिर्फ़ एक माँ और पत्नी की भूमिका तक सीमित रह गई हूँ। छोटी-छोटी बातों पर भी मैं खुद को दोष देने लगती हूँ और सोचती हूँ कि मैं कुछ भी ठीक से नहीं कर पाती। सामाजिक मेल-मिलाप में जाने से भी डर लगने लगा है, कहीं लोग मुझे उबाऊ न समझ लें। कभी-कभी तो दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है और साँस फूलने लगती है। मैं कैसे अपने आत्म-सम्मान को वापस पा सकती हूँ और खुद में विश्वास जगा सकती हूँ? मैं फिर से अपने आप को मूल्यवान महसूस कैसे करूँ?

अनाहिता

मनोवैज्ञानिक और एआई

एक मध्यम आयु की महिला खिड़की के पास बैठी है, सूरज की रोशनी उसके चेहरे को रोशन कर रही है। वह एक फोटो एल्बम देख रही है, जो बदलाव और नई शुरुआत की खोज की भावना दर्शाता है।

प्रिय मीरा, आपके द्वारा अनुभव किए जा रहे ये भाव बिल्कुल वैध हैं और मध्यम आयु में संक्रमण के दौरान कई लोगों को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जीवन के इस चरण में भूमिकाओं और प्राथमिकताओं में बदलाव होता है, जिससे पहचान का संकट और आत्मविश्वास में कमी की भावना पैदा हो सकती है। आपके लक्षण, जैसे दिल तेज धड़कना और सांस फूलना, तनाव या चिंता की प्रतिक्रिया भी हो सकते हैं।

अपने आत्म-सम्मान को फिर से बनाने के लिए, पहला कदम स्वयं के प्रति दयालुता का अभ्यास करना है। अपने आप को दोष देना बंद करें और यह समझें कि आपने वर्षों तक जो भूमिकाएं निभाईं, वे मूल्यवान थीं। अब, नए उद्देश्यों की खोज पर ध्यान दें। कोई नया शौक, स्वैच्छिक कार्य, या छोटा कोर्स शुरू करने पर विचार करें। यह आपको एक नई पहचान और उपलब्धि की भावना दे सकता है।

सामाजिक संपर्क से बचने के बजाय, छोटे-छोटे कदम उठाएं। पहले किसी विश्वसनीय मित्र या परिवार के सदस्य के साथ मिलें, फिर धीरे-धीरे समूह गतिविधियों में भाग लें। याद रखें, लोग अक्सर हमारे बारे में उतना नहीं सोचते जितना हम समझते हैं। शारीरिक गतिविधि और ध्यान तनाव कम करने और आत्म-जागरूकता बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।

अपने आप को मूल्यवान महसूस कराने के लिए, प्रतिदिन की सकारात्मक पुष्टि का अभ्यास करें और अपनी छोटी-छोटी सफलताओं को लिखें। अपने जीवन के अनुभव और बुद्धिमत्ता को पहचानें। यदि भावनाएं बहुत अधिक बोझिल लगें, तो किसी पेशेवर परामर्शदाता से बात करना फायदेमंद हो सकता है, जो इस जीवन चरण के अनुकूलन में आपका मार्गदर्शन कर सके। यह यात्रा धैर्य और स्व-स्वीकृति की मांग करती है।

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