मनोवैज्ञानिक अनाहिता

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18 साल के विवाह के बाद भावनात्मक दूरी और अंतरंगता की कमी को कैसे दूर करें?

मैं 47 वर्ष का पुरुष हूँ और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता हूँ। मेरी शादी को 18 साल हो गए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मुझे लगता है कि मेरी पत्नी और मेरे बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। हम दोनों ही अपने-अपने कामों में इतने व्यस्त रहते हैं कि एक-दूसरे के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। जब हम साथ होते हैं भी, तो बातचीत सिर्फ घर के कामों, बच्चों की पढ़ाई या वित्तीय मामलों तक ही सीमित रह जाती है। पहले जो भावनात्मक जुड़ाव और हँसी-मज़ाक था, वह लगभग गायब हो गया है। मैं उस अंतरंगता को वापस पाना चाहता हूँ, लेकिन समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करूँ। क्या ऐसी स्थिति में रिश्ते में नई जान फूंकने के लिए कोई व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं? क्या लंबे समय तक चले रिश्तों में ऐसी उदासीनता सामान्य है, या यह किसी गहरी समस्या का संकेत है?

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मनोवैज्ञानिक और एआई

एक मध्यम आयु वर्ग के भारतीय जोड़े को आरामदायक सोफे पर बैठकर, हाथ पकड़कर और मुस्कुराते हुए बातचीत करते दिखाया गया है, जो भावनात्मक निकटता और पुनः जुड़ाव का प्रतीक है।

अरुण जी, आपके प्रश्न से स्पष्ट है कि आप अपने लंबे विवाहित जीवन में आई भावनात्मक दूरी से चिंतित हैं और उस अंतरंगता को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं। सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि लंबे रिश्तों में उदासीनता का आना पूर्णतः असामान्य नहीं है। जीवन की दिनचर्या, व्यस्तता और जिम्मेदारियाँ अक्सर रिश्तों को दोहराव और सतहीपन की ओर धकेल देती हैं। हालाँकि, यह स्थिति एक गहरी समस्या का स्वतः संकेत नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि रिश्ते पर ध्यान देने और उसे पोषित करने की आवश्यकता है।

शुरुआत करने के लिए, आप छोटे-छोटे जानबूझकर प्रयासों पर विचार कर सकते हैं। एक साथ बिताए जाने वाले समय की गुणवत्ता पर ध्यान दें। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप लंबे समय के लिए साथ रहें, बल्कि इसका अर्थ है विशेष और विचारपूर्ण समय निकालना। उदाहरण के लिए, सप्ताह में एक बार सिर्फ आप दोनों के लिए एक डिनर या एक छोटी सैर की योजना बनाएँ, जहाँ बातचीत का विषय केवल घर या बच्चे न हों। इस दौरान भावनाओं, सपनों, यादों या हल्के-फुल्के विषयों पर चर्चा करने का प्रयास करें।

संचार के तरीके को बदलना एक और महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। आप दोनों व्यस्त हैं, ऐसे में सक्रिय सुनने का अभ्यास करें। जब आपकी पत्नी कुछ कहें, तो उस पर पूरा ध्यान दें और उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें, सिर्फ समस्या का समाधान सुझाने पर ध्यान केंद्रित न करें। साथ ही, प्रशंसा और कृतज्ञता व्यक्त करना न भूलें। छोटी-छोटी चीज़ों के लिए 'धन्यवाद' कहना या एक-दूसरे के काम की सराहना करना सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा दे सकता है।

शारीरिक अंतरंगता भावनात्मक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे फिर से बनाने के लिए कोमल शारीरिक संपर्क जैसे हाथ पकड़ना, गले लगाना या एक साथ बैठना, बिना किसी दबाव के शुरू किया जा सकता है। यह केवल यौन अंतरंगता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्नेह के सरल इशारे भी महत्वपूर्ण हैं।

यदि आप पाते हैं कि स्वयं प्रयासों से अपेक्षित परिवर्तन नहीं आ रहा है, तो पेशेवर मार्गदर्शन लेना एक व्यावहारिक विकल्प है। एक वैवाहिक परामर्शदाता या रिश्ता विशेषज्ञ आप दोनों को सुरक्षित माहौल में संवाद करने और गहरी समस्याओं को समझने में मदद कर सकता है। यह किसी कमी का संकेत नहीं, बल्कि रिश्ते के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

अंत में, याद रखें कि रिश्ते जीवित चीज़ें हैं, इन्हें निरंतर देखभाल और निवेश की आवश्यकता होती है। परिवर्तन रातोंरात नहीं आएगा, लेकिन लगातार और ईमानदार प्रयास निश्चित रूप से भावनात्मक निकटता और अंतरंगता की ओर वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। आपकी इच्छा ही पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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